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बुधवार, 8 मार्च 2017

बोल के लब आज़ाद हैं

बोल के लब आज़ाद है तेरे
ज़बा तेरी आज़ाद है
उठा कर हक का परचम
बन गया तु हक की आवाज हैं
अब चमन मे हर तरफ
चल रही नफ़रतो की आंधियाँ
लुटने को अमन चमन का
लगी डाकुऔ की टोलियाँ
करने को  नाकाम उनके मन्सुबे
तु हो जा खड़ा कि
मुल्क से तुझको प्यार है
कर मुकाबला इन डाकुऔ का
देश की यलगार है
कर मुकाबला इन बोल के लब आज़ाद है तेरे
ज़बा तेरी आज़ाद है
उठा कर हक का परचम
बन गए तु हक की आवाज हैं
अब चमन मे हर तरफ
चल रही नफ़रतो की आंधियाँ
लुटने को अमन चमन का
लगी डाकुऔ की टोलियाँ
करने को  नाकाम उनके मन्सुबे
तु हो जा खड़ा कि
मुल्क से तुझको प्यार है
कर मुकाबला इन डाकुऔ का
देश की यलगार है
कर मुकाबला इन ढोंगियो का
वक्त की ललकार है का
वक्त की ललकार है

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