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शनिवार, 5 जनवरी 2019

व्यथा 2

एक सीप को चाहा था जिसमें सिमटा था मोती,
हर प्रयास विफल हुआ न सीप मिला, ना मोती।

एक सदफ लिए निकले थे कि कहीं मिल जाए जाम ए जम
मगर उसको भी भर कर ले गए प्याले वाले।

इस तरह बयाँ करू व्यथा अपनी
सुन कान लगा, हंसते हैं सताने वाले।

मेरे महबूब तुझे चाहने का मिला है यह सिला,
रंजो गम में हम हो रहे कतरा कतरा।

जब चले थे इस मंजिल की तरफ तो साथी थे बहुत,
अब सब ने पकड़ ली है अलग अलग राहें ।

क्या पुछते है शोएब से तुम हाल उसका,
उसके हालात कुजा उसकी बात कुजा है 

शब्दार्थ:
सदफः शराब पीने का छोटा सा प्याला
जाम ए जम : ईरान के मशहूर बादशाह जमशेद का प्याला
कूजा:भिन्न/अलग

व्यथा 1

तुम को क्या बतलाएं बंधु
एक स्वपन था
जो टूट गया
एक आभासी घरोंदा था
जो फूट गया
हाय !
अपनी व्यथा
व्यर्थ यूं हि
समय गवांया 
इन स्वपन को बुनने में
छणभर का ही
समय लगा
इस स्वपन महल को
गिरने में.
x

स्वप्न

हंसी मजाक के वातावरण में जब गुजर जाते हैं अनेक दिन तो प्रतीत होने लगता है वास्तविक ।  हंसी मजाक में तप कर बाहर निकलने वाला सच मानो...

tahlka