तुम को क्या बतलाएं बंधु
एक स्वपन था
जो टूट गया
एक आभासी घरोंदा था
जो फूट गया
हाय !
अपनी व्यथा
व्यर्थ यूं हि
समय गवांया
इन स्वपन को बुनने में
छणभर का ही
समय लगा
इस स्वपन महल को
गिरने में.
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हंसी मजाक के वातावरण में जब गुजर जाते हैं अनेक दिन तो प्रतीत होने लगता है वास्तविक । हंसी मजाक में तप कर बाहर निकलने वाला सच मानो...
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