ना कोई हाला ना कोई
प्याला
ना कोई साकी ना कोई
मैयखाना
साकी तु कहां है? तेरा
इरादा क्या है!
क्यों बंद हैं मयख़ाना तेरा
तु और तेरी हाला
कहां हैं
क्यों आखिर तेरे जाम
रुके
हम को भी तो बता
आखिर ये माजरा क्या
है!
किसी आदमी की ज़िंदगी में मोहब्बत कब दाख़िल होती है, इसका ठीक-ठीक पता शायद उसे भी नहीं चलता। बाद में जब वह पीछे मुड़कर देखता है तो उसे लगता...
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