कविता ,लेख जो निकले शोएब की क़लम से
हंसी मजाक के वातावरण में जब गुजर जाते हैं अनेक दिन तो प्रतीत होने लगता है वास्तविक । हंसी मजाक में तप कर बाहर निकलने वाला सच मानो...
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