कविता ,लेख जो निकले शोएब की क़लम से
किसी आदमी की ज़िंदगी में मोहब्बत कब दाख़िल होती है, इसका ठीक-ठीक पता शायद उसे भी नहीं चलता। बाद में जब वह पीछे मुड़कर देखता है तो उसे लगता...
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