बहुत दिनों तक
छिपाए अपने मन में
प्रेम निमंत्रण
एक दिन कर ही दिया
उसने प्रेमिका से निवेदन
कि मैं करता हूँ
तुमसे प्यार।
प्रेमिका ने कहा,
आशिक़ मेरे
है यह सब बेकार
मैं तो शादीशुदा हुँ
पाबंद ए हया हुँ
बंद करो प्यार का रोना
तुम्हारा निवेदन पुरा नही होना
क्या लोकतंत्र में विरोध की आवाज़ को राजधानी से दूर किया जा सकता है? Jantar Mantar पर उठे सवाल के बीच असहमति, सार्वजनिक व्यवस्था और संवैधा...
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