वह फिर नहीं आएगी
उसने पूछा था—
“क्या खाली रहते हो?”
मैंने कहा—“हाँ।”
उसने मुझे काम में लगा दिया।
मैं इतना काम में लगा कि
उसके लिए ही वक़्त कम पड़ने लगा…
और वह उसी वजह से
मुझे हमेशा के लिए छोड़कर चली गई।
कभी-कभी लगता है,
अभी पीछे से उसकी आवाज़ आएगी—
“मैं आ गई…”
जानता हूँ,
अब ऐसा नहीं होने वाला।
मगर इस मन को कौन समझाए?
कुछ आवाज़ें कानों से नहीं,
यादों से सुनी जाती हैं…
और कुछ इंतज़ार ऐसे होते हैं
जिनका लौटकर आना मुमकिन नहीं होता।
ज़िंदगी के सफ़र में
गुज़र जाते हैं जो मकाँ,
वो फिर नहीं आते…
और शायद कुछ लोग भी
उन मकानों जैसे होते हैं—
जिनसे हम आगे तो निकल जाते हैं,
मगर उम्र भर
पीछे मुड़कर देखते रहते हैं।
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